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यमुनानगर:-केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री रतनलाल कटारिया ने केंद्र सरकार की फ्लैगशिप कार्यक्रम जल जीवन मिशन की प्रगति पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की

यमुनानगर:-केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री रतनलाल कटारिया ने केंद्र सरकार की फ्लैगशिप कार्यक्रम जल जीवन मिशन की प्रगति पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की



।मंत्री कटारिया ने कार्यक्रम की प्रगति पर संतोष जताते हुए बताया कि जल जीवन मिशन कार्यक्रम की अगस्त 2019 में शुरुआत के समय पूरे देश में 18.93 करोड़ ग्रामीण घरों में से केवल 3.23 करोड ग्रामीण घरों में पेयजल के लिए नल के कनेक्शन थे। जबकि पिछले 1 साल में ग्रामीण क्षेत्रों से 3.04 करोड़ नए नल कनेक्शन इस कार्यक्रम के तहत दिए गए हैं।जल जीवन मिशन का कार्यक्रम पूरे देश के हर ग्रामीण घर में कोई भी ना छूट जाए कि लक्ष्य के साथ शुरू किया गया है।कटारिया ने जल जीवन मिशन को एक मूक क्रांति का नाम देते हुए बताया कि जल मिशन के अंतर्गत देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में जाति,  समुदाय,धर्म तथा वर्ण के भेदभाव के बिना प्रतिदिन 55 लीटर प्रति व्यक्ति पीने योग्य पानी नल कनेक्शन के द्वारा दिए जाने की योजना है।गरीब और समाज के पिछड़े तथा कमजोर वर्ग के लोगों के लिए लागू की गई यह योजना मोदी सरकार की मुख्य प्राथमिकता है।मंत्री कटारिया ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में नल से जल के लक्ष्य को प्राप्त करने वाला गोवा देश का पहला राज्य बन गया है।इसके साथ-साथ तेलंगाना, गुजरात, हरियाणा तथा संघ शासित प्रदेश पांडुचेरी भी शत-प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त करने में बाकी राज्यों से आगे चल रहे हैं।हिमाचल प्रदेश, बिहार मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश तथा अंडमान निकोबार ने भी इस दिशा में अच्छी प्रगति की है।मंत्री कटारिया ने हरियाणा सरकार की तारीफ  करते हुए बताया कि देश भर के 27 जिलों में से अंबाला, पंचकूला, कुरुक्षेत्र 3 जिले हैं, जिन्होंने शत-प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त किया है।उन्होंने इसके लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को बधाई दी तथा उम्मीद जाहिर की कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में वर्ष 2022 तक हरियाणा राज्य शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य प्राप्त कर लेगा।उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों को इस मिशन के लिए समुचित बजट का आवंटन किया गया है तथा इसके लिए केंद्र सरकार से बजट की कमी नहीं आने दी जाएगी।उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार व पश्चिम बंगाल सरकार इस दिशा में केंद्र सरकार द्वारा जारी बजट का बहुत कम उपयोग कर रही है जो कि एक चिंता का विषय है।

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