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यमुनानगर:-भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार 27 मार्च 2021 को मन की बात कार्यक्रम में रादौर विकास खण्ड के गांव हाफिजपुर के 53 वर्षीय पूर्व अध्यापक एवं मधुमक्खी पालक किसान सुभाष काम्बोज का जिक्र करते हुए कहा कि अन्य लोग उनके व्यवसाय को अपनाकर आत्म निर्भर बनें

यमुनानगर:-भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार 27 मार्च 2021 को मन की बात कार्यक्रम में रादौर विकास खण्ड के गांव हाफिजपुर के 53 वर्षीय पूर्व अध्यापक एवं मधुमक्खी पालक किसान सुभाष काम्बोज का जिक्र करते हुए कहा कि अन्य लोग उनके व्यवसाय को अपनाकर आत्म निर्भर बनें।

यमुनानगर:-




आत्म निर्भरता के क्षेत्र में पूर्व अध्यापक की व्यवसाय की शैली अपने आप में एक उदाहरण है। सुभाष काम्बोज प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का हिस्सा बनने पर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा की गई प्रशंसा से उन्हें जीवन में आगे बढऩे का और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा मीडिया सैंटर में पत्रकारों से रूबरू होते हुए मधुमक्खी पालक किसान सुभाष काम्बोज ने बताया कि वे स्नातक पास हैं और उन्होंने डीपीएड का डिप्लोम भी किया हुआ है और 1996 से पहले उन्होंने प्राईवेट विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य किया है। उन्होंने बताया कि वे 10 एकड़ में खेती करते हैं और 1996 में खादी ग्राम उद्योग से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मधुमक्खी पालन के 6 बॉक्स से कार्य शुरू किया था और 2006 से लेकर आज तक उनके पास लगभग 2 हजार मधुमक्खी के बॉक्स हैं। यह सभी बॉक्स भी पारम्परिक 6 बक्सों से ही विकसित किए हैं। मधुमक्खी पालन के इन बॉक्स को वे मौसम व फूलों की उपलब्धता के आधार पर अन्य राज्यों जैसे महाराष्टï्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर आदि में स्थानांतरण करते हैं।मधुमक्खी पालन किसान सुभाष काम्बोज ने बताया कि वे पूरे भारत में खुद शहद बिक्री करते हैं। उनका शहद भारत के कई राज्यों जैसे तमिलनाडू, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्टï्र, कलाकत्ता आदि में बिक रहा है। वहीं दूसरी और सरसों के फूलों का शहद बाहर दूसरे देशों जैसे अमेरिका आदि में बिक रहा है। सरसों के फूलों से मधुमक्खियों द्वारा तैयार किए गए शहद की बाहर के देशों में ज्यादा मांग है। उन्होंने बताया कि उनका 35 से 40 लाख रूपये का वार्षिक शहद का कारोबार है और उन्हें लगभग 15 लाख रूपये वार्षिक आमदनी होती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 3 हजार से ज्यादा ग्रामीण लोगों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देकर आत्म निर्भर बनाया है।  उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में पारम्परिक फसलों के अलावा बाग भी लगाया हुआ है। जहां पर मधुमक्ख्यिों को बॉक्स रखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद के अतिरिक्त 6 उत्पाद- मोम, कोम्ब हनी, बी प्रोपोलिश, बी पोलन, वी वनम व रायल जैली का उत्पाद भी तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि आईबीडीसी कुरूक्षेत्र में उनको हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हरियाणा के पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, उदयपुर विश्वविद्यालय व यमुनानगर के उपायुक्त रोहतास खर्ब द्वारा उन्हें मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में सम्मानित किया गया है। प्रगतिशील मधुमक्खी पालक किसान सुभाष काम्बोज ने युवाओं एवं किसानों के लिए अपने संदेश में कहा है कि वे आत्म निर्भरता के किसी भी व्यवसाय को मेहनत व लग्न से करें। सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने बताया कि किसान पारम्परिक खेती को नुकसान का धंधा समझने लगे हैं। इसलिए वे खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन, बागवानी, पशु डेयरी, दलहन व तिलहन की खेती से जोडकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पारम्परिक खेती में किसान के पास वर्ष में केवल 2 या 3 मास का ही कार्य होता है। वर्ष का शेष समय खेती से जुड़े वैकल्पिक व्यवसायों को आधुनिक मांग के अनुसार वैज्ञानिक दृष्टि से इन कार्यों को अपनाने से किसानों के लिए आय उर्पाजन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यमुनानगर के जिला उद्यान अधिकारी डा. रमेश पाल सैनी, आईबीडीसी कुरूक्षेत्र के डा. बिल्लू यादव व कृषि विज्ञान केन्द्र दामला के डा. नरेन्द्र गोयल ने उनके मधु मक्खी पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने में अपना विशेष योगदान दिया है।


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