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यमुनानगर/2113 किलोमीटर दूर पहुंचाया मजदूर का पार्थिव शरीर,प्रवासी श्रमिकों के दस्तावेज और सरकारी लाभ सुनिश्चित करे सरकार: श्री मानव सेवा समिति ट्रस्ट

2113 किलोमीटर दूर पहुंचाया मजदूर का पार्थिव शरीर, श्री मानव सेवा समिति ट्रस्ट ने उठाया करीब 50 हजार रुपये का खर्च।
यमुनानगर। यमुनानगर में मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले पश्चिम बंगाल निवासी 51 वर्षीय श्रमिक सूर्यनाथ दास की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। मौत के बाद उनके परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव तक पहुंचाने की थी। ऐसे समय में श्री मानव सेवा समिति ट्रस्ट ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए करीब 2113 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल स्थित उनके पैतृक गांव तक पार्थिव शरीर पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाई।
ट्रस्ट के अनुसार सूर्यनाथ दास पुत्र देवनाथ दास, निवासी जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल, लंबे समय से यमुनानगर जिले में रहकर दिहाड़ी मजदूरी करते थे। वह दामला क्षेत्र में लेबर कमरों में रहते थे। बीती मध्य रात्रि करीब 11 बजे ट्रस्ट सदस्य रंजन कुमार के माध्यम से संस्था के संस्थापक जयप्रकाश कुमार को सूचना मिली कि एक श्रमिक की हृदय गति रुकने से मौत हो गई है।
सूचना मिलते ही ट्रस्ट ने मृतक के परिजनों से संपर्क किया। परिजनों को पश्चिम बंगाल से यमुनानगर पहुंचने और फिर पार्थिव शरीर को वापस ले जाने में काफी समय लगने की संभावना थी। ट्रेन की उपलब्धता और लंबी दूरी को देखते हुए परिजनों के साथ विचार-विमर्श के बाद ट्रस्ट ने तत्काल अपनी एंबुलेंस से पार्थिव शरीर को उसके पैतृक गांव भेजने का निर्णय लिया।
ट्रस्ट सदस्यों रतन दास, दीपक कुमार, सुजीत कुमार, विष्णु, राजू, सौरभ कुमार, कमलेश कुमार सहित अन्य सदस्यों के सहयोग से पार्थिव शरीर को पश्चिम बंगाल रवाना किया गया। संस्था के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में करीब 50 हजार रुपये का खर्च आया।
ट्रस्ट सदस्य रतन दास ने बताया कि सूर्यनाथ दास करीब 30 वर्षों से यमुनानगर जिले में रहकर मजदूरी कर रहे थे। उन्होंने मेहनत करके अपने बच्चों का पालन-पोषण किया और बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाकर उन्हें बेहतर पदों पर स्थापित किया। लेकिन खुद लंबे समय तक यमुनानगर में रहने के बावजूद स्थायी स्थानीय प्रमाणिकता से जुड़े दस्तावेज नहीं बनवा पाए।
रतन दास के अनुसार इसी वजह से संस्था को उनके परिवार को सरकारी योजनाओं या अन्य विशेष लाभ दिलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट लगातार श्रमिकों और उनके परिवारों को उनके अधिकारों, जरूरी दस्तावेजों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहा है।
श्री मानव सेवा समिति ट्रस्ट श्रमिकों के अधिकारों के संरक्षण और जरूरतमंद मजदूर परिवारों की सहायता के लिए कार्य कर रहा है। संस्था द्वारा श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा में मदद करने के साथ-साथ दुर्घटना या आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में जरूरतमंद परिवारों के लिए पार्थिव शरीर को उनके गृह क्षेत्र तक पहुंचाने का कार्य भी किया जाता है।
सूर्यनाथ दास का मामला एक बार फिर यह सवाल सामने लाता है कि वर्षों तक दूसरे राज्यों में मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवारों का भविष्य बनाने वाले श्रमिकों के लिए स्थानीय स्तर पर जरूरी दस्तावेज, पहचान और सरकारी योजनाओं तक पहुंच कितनी महत्वपूर्ण है।
सरकार से अपील: प्रवासी श्रमिकों का पंजीकरण और दस्तावेज सुनिश्चित हों
ट्रस्ट ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि जिले में लंबे समय से रहकर मजदूरी करने वाले प्रवासी श्रमिकों का सर्वे करवाकर उनका पंजीकरण और जरूरी दस्तावेज तैयार करवाने की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी श्रमिक की आकस्मिक मृत्यु, दुर्घटना या अन्य विपरीत परिस्थिति में उसके परिवार को सरकारी योजनाओं और आर्थिक सहायता का लाभ आसानी से मिल सके।


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