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यमुनानगर:-चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र दामला द्वारा यथा.स्थान फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजन किया गया

यमुनानगर, 19 दिसम्बर( )-चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र दामला द्वारा यथा.स्थान फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजन किया गया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ एनके गोयल ने किसानों व किसान महिलाओं का आह्वान करते हुए संदेश दिया कि फसल अवशेष प्रबंधन को विशेष महत्व देना आज की जरूरत बन गया है । इसका प्रबंधन करने से ही मिट्टी के परिस्थितिकी तंत्र को बचाया जा सकता है तथा फसल अवशेष के द्वारा जो आवश्यक पोषक तत्व फसल को मिलते हैं इन्हीं के द्वारा रसायनिक उर्वरकों की खपत में कमी लाई जा सकती है । उन्होंने मृदा जांच के बारे में भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी तथा मृदा जांच के फायदे के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। कृषि सहायक अभियंत्रिकी डॉ विनीत जैन ने किसानों को कृषि उपकरणों से जुड़ी जानकारी के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उन्होंने यह भी बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जो मशीनें विभाग ने तैयार की हैं उनमें मिट्टी पलटू हल, स्ट्रा चॉपर, मल्चर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर आदि हैं जिनकी सहायता से फसल अवशेषों को मिट्टी में मिला कर सुगमता से बिजाई अगली फसल की जा सकती है तथा इन मशीनों के लिए कृषि विभाग 50 प्रतिशत का अनुदान व्यक्तिगत खरीदने पर देता है तथा 80 प्रतिशत का अनुदान कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए देता है जो समूह बनाकर इन मशीनों को खरीदते हैं जिससे उनकी खरीद वैल्यू मैं किसान को बहुत फ ायदा तो मिलेगा ही साथ ही साथ अ'छे उपकरण फसल अवशेषों को प्रबंधन करने को भी मिलेंगे। डॉ गोविंद प्रसाद ने किसानों को बताया कि हैप्पी सीडर द्वारा गेहूं की धान के खड़े फानों में बिजाई के फायदों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यदि किसान धान के खड़े फ ानों में गेहूं की सीधी बिजाई करता है तो इससे समय की बचत होती है डीजल की खपत भी बहुत कम होती है तथा खेत की तैयारी के लिए जो समय की आवश्यकता होती है ना के बराबर होती है। तथा खड़े फ ानों में बिजाई की गई गेहूं फ रवरी मार्च में जब तेज हवा चलती है तो बहुत कम गिरती है। उन्होंने यह भी बताया कि फसल के विघटन को बढ़ाने के लिए किसान भारतीय किसान अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली द्वारा तैयार पूजा डी कंपोजर कैप्सूल का प्रयोग भी फसल अवशेषों को गलाने में प्रयोग कर सकते हैं। यह कैप्सूल मात्र 5 प्रति कैप्सूल की दर से भारतीय माइक्रोबायोलॉजी विभाग से प्राप्त कर सकते हैं। एकड़ की पराली के लिए 4 कैप्सूल पर्याप्त होते हैं। शिक्षण सहायक करण सैनी ने किसानों को बताया कि फसल अवशेषों को व्यर्थ मे जलाने की बजाय उससे कंपोस्ट तैयार करें या खेत में ही उन्हें मिलाने से सब्जी उत्पादन में इजाफ ा तो होगा ही साथ ही साथ जैविक सब्जियां उगा कर किसान अपनी सेहत को रसायनिक दवाइयों व उर्वरक से बचाने के साथ-साथ आय का भी एक अ'छा साधन अपना सकता है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ अजीत सिंह ने किसानों को मौसम के पूर्वानुमान के बारे में विस्तार पूर्वक बताया उन्होंने बताया कि दामिनी एप ई.मौसम ऐप मेघदूत ऐप के माध्यम से मौसम की पूर्व जानकारी ले सकता है तथा किसान को मौसम का पूर्वानुमान होने पर कृषि से संबंधित कौन-कौन से योग्य कार्य कर सकता है जिससे वह फसल पर पढऩे वाले नुकसान को आसानी से कम कर सकता है इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र का स्टाफ डॉ अंकुश कंबोज, यशपाल तथा लगभग 140 प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया।

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