यमुनानगर:नव वर्ष के आगमन किया गया प्रथम भक्तामर विधान पाठ का आयोजन
भक्तिभाव से पाठ करने से होती है दुखों व कष्टों की समाप्ती-दिनेश जैन
यमुनानगर:6 जनवरी: 1008 श्री पार्शवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जगाधरी के प्रांगण में नव वर्ष के आगमन पर प्रथम भक्तामर पाठ का भक्तिभाव व श्रद्धा पूर्वक आयोजन समाज रत्न पद्म विभूषण दर्शन लाल जैन के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंदिर प्रधान नरेन्द्र जैन ने की तथा संचालन महामंत्री अरविन्द्र जैन व कोषाध्यक्ष दीपक जैन ने किया।उपप्रधान दिनेश जैन ने कहा कि भक्तामर विधान एक अनोखी विधा है,जिसको भिन्न-भिन्न रंग रूप में पाया जाता है।इसके अध्ययन व पाठ से इसका चमत्कार देखने को मिलता है।भक्तामर का पाठ ध्यान व भक्ति से करने पर कष्टों का निवारण होता है,दुखों की समाप्ती होती है। इसका प्रभाव सभी कष्टों को मिटा जीवन को सुखमय व शांतिमय बनाता है।भवन प्रमुख संदीप जैन कहा कि भगवान किसी को कुछ नहीं देते, परंतु भगवान की भक्ति सब कुछ दे देती है। पुण्य रूपी सुगंध से भक्तों के मन खिल जाते है। आत्मा रूपी वृक्ष से लिपटे हुये कर्म रूपी बंधन खुल जाते है। उन्होंने कहा कि आदिनाथ स्त्रोत जो भक्ति रस का अद्वितीय महाकाव्य है उसकी रचना उस समय हुई जब राजा भोज के दरबार में कवि कालीदास तथा वररूची ने सा प्रदायिकता वश आचार्य प्रवर मानतंगु को राजा की आज्ञानुसार पकड़वाकर 48 तालों के अंदर कोठरियों में बंद करवा दिया उस समय आचार्य श्री ने आदिनाथ स्त्रोत की रचना की।प्रबंधक संचिन जैन ने कहा कि स्त्रोत के प्रभाव से ताले व जंजीरे अपने आप टूट गये और वह मुक्त हो गए।अंत में राजा ने हार स्वीकार कर आचार्य से क्षमा मांगी। आचार्य श्री से प्रभावित होकर जैन धर्म अपना लिया।पाठ के उपरांत आरती की गई।सह सचिव अंकित जैन ने आये हुये सभी अतिथियों व श्रद्धालुओं का धन्यवाद किया।

