यमुनानगर:5 जून:चौ.चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र दामला द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन गांव बकाना में किया गया।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ एनकेगोयल ने विश्व पर्यावरण दिवस का संदेश दिया कि हम सब की जिम्मेदारी है कि अपने पर्यावरण की रक्षा करें और पेड़ पौधे अधिक से अधिक लगाएं तथा परिस्थितिकी तंत्र को पुन: स्थापित होने में शीतल मन से सहयोग करें। उन्होंने बताया कि परिस्थितिकी तंत्र के अंदर इंसान के अलावा पेड-पौधे, पशु-पक्षी, जीव-जंतु, सूक्ष्मजीव व मृदा का सही स्वास्थ्य शामिल है।उन्होंने यह भी बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का मुख्य कारण लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत किया जाना है जो दरअसल दुनिया में बढ़ती जनसंख्या व प्रदूषण में बढ़ोतरी यह दिवस मनाने की जरूरत पैदा कर रहा है। डॉ फ तेह सिंह ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य के बारे में संपूर्ण जानकारी दी और बताया कि कम से कम रासायनिक कीटनाशक, शाकनाशक दवाइयों व रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करें जिससे मृदा के स्वास्थ्य को बचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि किसान भाई खेत की डोली पर फ ल-फू ल व छायादार वृक्ष अवश्य लगाएं जो पश-पक्षी व आस-पास के वातावरण को बचाने में सहयोग करता है और वन्यजीव व पक्षियों की विलुप्त होने वाली प्रजातियों को शरण देने में लाभकारी होते हैं।इस अवसर पर डॉ वीर सेन ने किसानों को बताया कि परिस्थितिकी तंत्र के जीर्णोद्धार में किसानों की अहम भूमिका मानी जाती है। किसानों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता होना अति आवश्यक है इसके लिए किसान को सलाह है कि पर्यावरण को बचाने में किसान अपना पूरा सहयोग दें। फ सल अवशेष ना जलाएं फ सल अवशेष मिट्टी में ही मिलाएं। मौसम विषय विशेषज्ञ डॉ अजीत सिंह ने किसानों को मौसम के पूर्वानुमान तथा फ सल उत्पादन को बढ़ावा देने वाले मौसम के घटकों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तेज हवाएं फ सल को बहुत नुकसान पहुंचाती है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि किसान को खेत की उत्तर व पश्चिम दिशा में बड़े वृक्ष अवश्य लगाने चाहिए जो तेज हवा के बहाव को सहन कर आपकी फ सल बचाने में सहयोग देते हैं और वातावरण को भी स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाते है। उन्होंने यह भी बताया कि कम वनस्पति व अत्यधिक प्रदूषण होने के कारण ग्रीन हाउस गैसों का स्तर बढ़ रहा है, जिससे पृथ्वी का तापमान लगातार धीर-धीरे बढ़ता जा रहा है और अधिक तापमान के कारण बर्फ के ग्लेशियर दिन प्रतिदिन पिघलकर समुद्र में समाहित हो रहे हैं तथा पृथ्वी के मौसम में संतुलन बिगड़ता जा रहा है तथा परिणाम स्वरूप मानसून में अनियमितता आना, गर्मी-सर्दी के मौसम का भी संतुलन बिगड़ता जा रहा है। प्रशिक्षण सहायक करण सिंह सैनी ने किसानों को हरे भरे पेड़.पौधे लगाने के फायदों के बारे में संपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पेड़.पौधे लगाने से वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा तो बढ़ती ही है जो श्वसन में आवश्यक होती है साथ ही साथ यह पश-पक्षी व जीव-जंतुओं को भी शरण देते हैं जिससे हानिकारक व लाभकारी जीव-जंतुओं में संतुलन बना रहता है तथा उन्होंने यह भी बताया कि यदि परिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है तो हानिकारक जीव फ सल को नुकसान पहुंचाने लगते हैं लाभकारी मित्र कीड़े भी हानिकारक रूप धारणकर लेते हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि पेड़.पौधे लगाने से किसान फल-फूल लकड़ी बेचकर अतिरिक्त आय भी ले सकता है।इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ एनके गोयल ने किसानों को आम, अमरूद व नींबू के पौधे वितरित किए व गांव के लगभग 80 प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया।