हरियाणा सरकार के नए फसल खरीद नियम किसानों के साथ अन्याय:- रोशन लाल।
गेहू ख़रीद में आ रही समस्याएं को लेकर इनेलो ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन ।
इनेलो ने ज़िला की मंडियों में खोला किसान कष्ट निवारण केंद्र।
इंडियन नेशनल लोकदल यमुनानगर ने जगाधारी अनाज मंडी के साथ साथ ज़िले की सभी मंडियों में किसान कष्ट निवारण केंद्र खोले गए है जिसमे किसानों को मंडियों में आने वाली समस्याओं को अधिकारियो से मिलकर हल करने का काम करवायेगे ! किसानो को फ़सल ख़रीद में आ रही समस्याओं को लेकर इनेलो ज़िला प्रधान रोशन लाल की अध्यक्षता में ज़िला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा
इस अवसर पर ज़िला प्रधान रोशन लाल ने हरियाणा सरकार द्वारा लागू किए गए नए फसल खरीद नियमों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ये नियम जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं और विशेष रूप से छोटे व सीमांत किसानों के लिए भारी परेशानी का कारण बनेंगे।
उन्होंने ने कहा कि सरकार द्वारा लागू बायोमेट्रिक सत्यापन, ऑनलाइन गेट पास, जियो-फेंसिंग और “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल की अनिवार्यता किसानों पर अनावश्यक डिजिटल बोझ डालती है। प्रदेश का बड़ा किसान वर्ग अभी भी तकनीकी संसाधनों से वंचित है, ऐसे में यह व्यवस्था उन्हें फसल बेचने से ही वंचित कर सकती है। इस मोके पर प्रदेश प्रवक्ता अर्जुन सुढ़ैल ने विशेष रूप से छोटे किसानों की समस्या उठाते हुए कहा कि दो से ढाई एकड़ वाले किसान अक्सर अपनी फसल ट्रैक्टर-ट्रॉली की बजाय “छोटा हाथी” या टेंपो में लेकर आते हैं, जबकि कई किसान किराए की ट्रॉली या किराए के साधनों का उपयोग करते हैं। ऐसे में सरकार यह स्पष्ट करे कि इन किसानों का वेरिफिकेशन कैसे होगा? क्या हर बार वाहन मालिक और किसान दोनों की जांच होगी? यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है और इससे किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रवक्ता अश्वनी दत्ता ने सरकार के उस निर्णय पर भी सवाल उठाया जिसमें रात 8:00 बजे के बाद मंडियों में एंट्री बंद कर दी गई है। उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल अक्सर देर रात तक मंडियों में पहुंचती है, ऐसे में यह समय सीमा पूरी तरह अव्यावहारिक है। इससे मंडियों के बाहर लंबी कतारें लगेंगी और जाम की स्थिति पैदा होगी, जिससे किसानों को आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इन नई व्यवस्थाओं के कारण मंडियों में अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था बढ़ेगी, जिससे खरीद प्रक्रिया प्रभावित होगी। इसके समाधान के लिए सरकार को चाहिए कि वह जो खरीद केंद्र (परचेज सेंटर) बंद कर दिए गए हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से दोबारा शुरू करे, ताकि मंडियों पर दबाव कम हो और किसानों को राहत मिल सके। प्रदेश कार्यकारिणी मेम्बर खिलाराम नरवाल ने आरोप लगाया कि सरकार इन जटिल नियमों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे किसान मजबूर होकर अपनी फसल कम दाम पर बेचने के लिए विवश होंगे।
उन्होंने मांग की कि छोटे किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए इन नियमों में तुरंत संशोधन किया जाए, रात 8 बजे की समय सीमा को समाप्त किया जाए, किराए के वाहनों से आने वाले किसानों के लिए सरल व स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए, बंद किए गए खरीद केंद्रों को तुरंत दोबारा चालू किया जाए और एमएसपी खरीद प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाया जाए ताकि अन्नदाता को परेशानी का सामना न करना पड़े। इस अवसर पर सुरेश कानड़ी,सर्वप्रिय जठलाना,गुरदयाल शेरपुर,कमल चमरोड़ी,समीर जद्दू,बलजिंदर कश्यप,मंगत राम सैनी,सुरेश शर्मा,मधुसूदन शर्मा,परवीन कैल,सुभाष खुर्दबन,मोहन तेजली,गुरजिंदर खेड़ी,रवि सुढल,सुरेन्द्र नंदा,अरविंद काम्बोज,गुरमीत खुर्दबन,धर्मजीत ससौली,सतीश तरार आदि सैकड़ों इनेलो कार्यकर्ता मौजूद रहे
