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भारत की नारी ने कभी चुनौतियों से पीछे हटना नहीं सीखा, स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक हर महत्वपूर्ण परिवर्तन में महिलाओं की भूमिका निर्णायक रही है - विधायक घनश्यामदास अरोड़ा।

भारत की नारी ने कभी चुनौतियों से पीछे हटना नहीं सीखा, स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक हर महत्वपूर्ण परिवर्तन में महिलाओं की भूमिका निर्णायक रही है - विधायक घनश्यामदास अरोड़ा।

यमुनानगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने बताया कि इस लोकसभा सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सरकार ने विपक्ष की अनेक मांगों और सुझावों को स्वीकार करते हुए सहमति बनाने का वातावरण तैयार करने की पूरी कोशिश की। लोकतंत्र संवाद से चलता है, और संवाद के लिए सरकार की ओर से निरंतर प्रयास भी हुए। लेकिन इसके बावजूद जिस प्रकार से महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का यह ऐतिहासिक अवसर आगे नहीं बढ़ सका, उसने देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को प्रतीक्षा में छोड़ दिया है। यह केवल एक प्रक्रिया का रुकना नहीं था—यह एक भावनात्मक अपेक्षा का ठहर जाना था।विधायक घनश्यामदास अरोड़ा ने बताया कि सोचिए, यदि यह व्यवस्था लागू हो जाती तो 2029 का भारत कैसा होता? संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी दिखाई देती। नीति निर्माण की प्रक्रिया में संवेदनशीलता, संतुलन और सामाजिक समावेशन की नई दिशा मिलती। सबसे महत्वपूर्ण बात देश की बेटियों को यह संदेश मिलता कि उनका लोकतंत्र उन्हें केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति-निर्माता के रूप में भी स्वीकार करता है। यह संदेश आने वाली पीढ़ियों के आत्मविश्वास को नई ऊँचाई देता। कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष ने नारी शक्ति वंदना अधिनियम का विरोध करके महिला विरोधी मानसिकता का परिचय दिया है, देश की महिला शक्ति यह सब देख रही है व समय आने पर अपनी वोट की ताकत से विपक्ष को सबक सिखाने का कार्य महिला शक्ति करेगी ऐसा उन्हें विश्वास है।

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