यमुनानगर में वन विभाग ने सेंचुरी क्षेत्र की वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण और गैर-वन गतिविधियों को लेकर बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। विभाग की ओर से जारी एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सेंचुरी क्षेत्र के भीतर आने वाली भूमि, चाहे राजस्व रिकॉर्ड में निजी स्वामित्व के रूप में दर्ज हो, फिर भी वन भूमि की श्रेणी में आएगी और उस पर वन कानून पूरी तरह लागू होंगे।
दरअसल, ग्राम फेजपुर की लगभग 1054 एकड़ भूमि को हरियाणा सरकार ने पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम यानी पीएलपीए 1900 के तहत अधिसूचित किया था। इसके बाद वर्ष 1996 में इस क्षेत्र को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत सेंचुरी क्षेत्र घोषित किया गया। लेकिन विभाग के संज्ञान में यह बात आई कि इस क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा अवैध निर्माण, भूमि उपयोग परिवर्तन और अन्य गैर-वन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
वन विभाग ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भूमि का वन स्वरूप अधिक महत्वपूर्ण है, न कि केवल उसका राजस्व रिकॉर्ड। टी.एन. गोदावर्मन मामले से लेकर बी.एस. संधू और वर्ष 2022 के नरिंदर सिंह बनाम दिवेश भूटानी मामले तक अदालतें यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि पीएलपीए के तहत अधिसूचित भूमि वन भूमि मानी जाएगी और उस पर Forest Conservation Act, 1980 लागू होगा।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी वन भूमि का गैर-वन कार्यों में उपयोग नहीं किया जा सकता। न तो ऐसी भूमि को निजी व्यक्तियों को पट्टे पर दिया जा सकता है और न ही प्राकृतिक वृक्षों को हटाकर अन्य गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं।
वन विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सेंचुरी क्षेत्र में चल रही सभी अवैध गतिविधियों और अतिक्रमणों की तत्काल पहचान की जाए। दोषियों को नोटिस जारी किए जाएं, अवैध कब्जे हटाए जाएं और Forest Conservation Act 1980, Indian Forest Act 1927 तथा Wildlife Protection Act 1972 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इतना ही नहीं, राजस्व विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर रिकॉर्ड में भी आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संबंधित भूमि को स्पष्ट रूप से "सेंचुरी क्षेत्र" अथवा "वन भूमि" के रूप में दर्ज किया जा सके। विभाग ने इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए हैं।
इस आदेश के बाद यमुनानगर के सेंचुरी क्षेत्र में आने वाली वन भूमि पर कब्जा करने वालों, अवैध निर्माण करने वालों और भूमि का गैर-वन उपयोग करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आने वाले दिनों में वन विभाग का अभियान और तेज होने की संभावना है।
